Environment

अंक की तस्वीर ( अंक : 23 )

[ चित्र आभार : पूजा सुन्डी, प्रबंधक (पर्यावरण), निगम मुख्यालय ]     भारतीय हाथी : जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, रामनगर, उत्तराखंड   स्थिति: संकटग्रस्त जनसंख्या : 20,000 – 25,000 वैज्ञानिक नाम : एलीफस मैक्सिमस इंडिकस (Elephas maximus indicus) ऊंचाई : 6-11 फीट (कंधे तक) वज़न: 5 टन लंबाई: 21 फीट तक निवास: उपोष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले वन, उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले नम वन, शुष्क वन, घास के मैदान (Subtropical broadleaf forest, tropical broadleaf moist forest, dry forest, grassland)   हाथी भारत के साथ-साथ पूरे एशिया में एक सांस्कृतिक प्रतीक है। ये समूह में रहना पसंद करते हैं तथा अपनी सामाजिक संवेदना एवं बुद्धिमता (intelligence) के कारण प्राणिजगत में इनका खास स्थान है। भारतीय हाथी का मुख्य भोजन घास होता है, लेकिन बड़ी मात्रा में ये पेड़ों की छाल, जड़ें, पत्तियां और छोटे तने भी खाते हैं। कृषि फसलें जैसे केले, धान, गन्ना आदि भी इनके पसंदीदा भोजन हैं। प्रतिदिन भोजन करते हुए एवं अपने आवास के एक बड़े क्षेत्र में घूमते हुए ये गोबर का उत्पादन करते हैं, इससे अंकुरित बीजों को फैलाने में मदद मिलती है। इस तरह ये अपने जंगल तथा घास के मैदानों के आवास की अखंडता को बनाए रखने तथा  पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) में संतुलन ...

 May 15, 2024


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काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में जंगल सफारी

[ Picture Source : विशाल शर्मा, समूह वरिष्ठ प्रबंधक (पर्यावरण)]     काजीरंगा नेशनल पार्क, डिब्रूगढ़ से 235 km एवं गुवाहाटी से लगभग 220 km की दूरी पर है । जोरहाट रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी 90 km है। काजीरंगा नेशनल पार्क की यात्रा मैंने परिवार के साथ डिब्रुगढ़ से शुरू की। डिब्रूगढ़, रेल एवं वायु मार्ग द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़ा हुआ है। डिब्रूगढ़ से काजीरंगा नेशनल पार्क टॅक्सी एवं बस से जाया जा सकता है। काजीरंगा नेशनल पार्क असम के गोलाघाट, नगाँव और शोणितपुर जिलों में स्थित है। डिब्रूगढ़ से सुबह 10 बजे निकलने पर हम 4 बजे तक काजीरंगा नेशनल पार्क के कोहोरा रेंज पहुँच चुके थे जहाँ एक रेस्ट हाउस में हमारे ठहरने की व्यवस्था थी। रेस्ट हाउस के माध्यम से हमने सुबह 6 से 7 बजे के लिए कोहोरा रेंज से एलिफ़ेंट सफारी के लिए बुकिंग की। उसी दिन के लिए हमने बागोरी रेंज से जीप सफारी के लिए 10 बजे से 12 बजे के लिए बुकिंग की ।   काजीरंगा का एक संरक्षित क्षेत्र के रूप में इतिहास वर्ष 1904 से प्रारंभ होता  है, जब मेरी कर्ज़न, जो तत्कालीन भारत के वायसराय लॉर्ड कर्ज़न की पत्नी थीं, ने क्षेत्र का दौरा किया। जिस ...

 May 15, 2024


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महुआ – भारत की जनजातीय आबादी के लिए वरदान

Picture Source : https://www.aranyapurefood.com/blogs/news/mahua-tree-kalpvriksra-of-tribal-area https://www.sourcedjourneys.com/post/the-tree-of-life http://anyflip.com/zptxm/ambt   मधुका लॉन्गीफोलिया अथवा इंडियन बटर ट्री जिसे सामान्य भाषा में महुआ कहते हैं सैपोटेसी परिवार का एक महत्वपूर्ण वृक्ष है । यह वृक्ष मध्य भारतीय राज्यों की जनजातीय आबादी के लिए सामाजिक तथा आर्थिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है । भारत में यह वृक्ष मुख्य रूप से पश्चिमी, मध्य तथा दक्षिणी भारत के अर्ध-पर्णपाती शुष्क वनों में पाया जाता है तथा इसका विस्तार मुख्यतः आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में है । यह एक बहुउद्देशीय वृक्ष है जिससे भोजन, ईंधन, लकड़ी, हरित खाद, तेल, खली, शराब प्राप्त होती है तथा यह अनेक उत्पादों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराता है।   वृक्ष विवरण महुआ एक मध्यम से बड़े आकार का पर्णपाती एवं तीव्रता से बढ़ने वाला वृक्ष है जिसकी ऊँचाई 20-25 मीटर तक हो सकती है। इसकी लकड़ी कठोर से अति कठोर श्रेणी की होती है जिसमें सैपवुड की मात्रा अधिक होती है तथा हार्डवुड भूरे-लाल रंग की होती है । पत्तियाँ जो शाखाओं के सिरों के पास एकत्रित होती हैं, अण्डाकार या लंबाकार-अण्डाकार, चिकनी तथा रोमरहित होती हैं। युवा पत्तियाँ गुलाबी-लाल और निचली सतह पर रोमिल होती हैं। फूल सफेद-क्रीम रंग के तथा ट्यूबुलर ...

 May 15, 2024


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