कोविड-19 का प्रकोप विश्व में फैलता जा रहा है। प्रतिदिन ग्लोब पर संक्रमित होने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। मानवता को अपेक्षा करनी चाहिए कि जितनी शीघ्रता से हो सके, कोई प्रभावी दवा अथवा टीके का इजाद हो सके और हम कोरोना प्रसारित महामारी से मुक्ति पा सकें। केवल फैलता हुआ संक्रमण ही समस्या नहीं है, लॉकडाउन के कारण कार्यालय, फैक्ट्रियाँ, स्कूल-कॉलेज, यात्रा-परिवहन सब कुछ हाशिये पर है। लोक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था थम गई है। विश्व सबसे बड़ी मंदी की तरफ धकेला जा रहा है, अर्थात किसी भी मोर्चे पर कोई अच्छी खबर नहीं, पर क्या सचमुच ऐसा है?

 

 

सभी पर्यावरण शोध संस्थानों का मंतव्य है कि वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन में बड़ी लगाम लग गई है। अमेरिका के न्यूयार्क से ले कर भारत के मुंबई तक प्रदूषण का स्तर पचास प्रतिशत से भी नीचे गिर गया है (बीबीसी हिन्दी)। इसे इन दिनों दिख रहे नीले और चमकीले आसमान से देखा समझा जा सकता है। गंगा और यमुना जैसी देश की सर्वाधिक प्रदूषित नदियाँ पारदर्शी हो गई हैं। चाँद अधिक चमकीला, तारे अधिक जगमग, फूल अधिक चटखीले और पशु-पक्षी मानव बस्तियों में स्वच्छंद दिखाई पड़ रहे हैं। कई पर्यावरणविदों का मानना है कि यह वायरस मनुष्य और प्रकृति के बीच पैदा हुए असंतुलन का दुष्परिणाम है। परिवेश के परिवर्तनों को देखते हुए इस तथ्य से सहमत हुआ जा सकता है। वस्तुत: विगत कुछ दशकों से हो रहे पारिस्थितिकीय परिवर्तन, अनियंत्रित आर्थिक विकास और प्राकृतिक संसाधनों के बिना सोचे समझे किए जा रहे दोहन ने पारिस्थितिकीय तंत्र के अनुचित तथा असंतुलित प्रयोग को बढ़ाया है। कोरोना-काल हमें ठहर कर यह सब मूल्यांकित करने और सतत विकास की अवधारणा को नए तरीके से सोचने के लिए बाध्य कर रहा है।

 

 

एनएचपीसी के सभी अधिकारी और कार्मिक, केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप व्यक्तिगत सुरक्षा का पालन करते हुए देश की प्रगति में यथासंभव योगदान दे रहे हैं। मैं कामना करता हूँ कि इस कठिन समय से हम धैर्य पूर्वक सुरक्षा मानदंडों को पूरा करते हुए पार पा सकेंगे। सभी स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें, देश के विकास की चिंता करें, पर्यावरण की चिंता करें, यही सर्वे भवन्तु सुखिन: की मैं कामना करता हूँ।

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                     

                                          (हरीश कुमार)

कार्यपालक निदेशक (पर्यावरण एवं विविधता प्रबंधन)

 

 

 

Image source :  https://www.kwit.org/post/impact-covid-19-earth-day-and-environment